अयोध्याकाण्ड · छंद · छंद
जेहि भाँति सोकु कलंकु जाइ उपाय करि कुल पालही।
मूल पाठ
जेहि भाँति सोकु कलंकु जाइ उपाय करि कुल पालही।
हठि फेरु रामहि जात बन जनि बात दूसरि चालही॥
जिमि भानु बिनु दिनु प्रान बिनु तनु चंद बिनु जिमि जामिनी।
तिमि अवध तुलसीदास प्रभु बिनु समुझि धौं जियँ भामिनी॥
स्रोत अभिलेख 2.5 · पुस्तक पृ. 385, 385
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिस तरह [नगरभरका] शोक और [तुम्हारा] कलङ्क मिटे, वही उपाय करके कुलकी रक्षा कर। वन जाते हुए श्रीरामजीको हठ करके लौटा ले, दूसरी कोई बात न चला। तुलसीदासजी कहते हैं—जैसे सूर्यके बिना दिन, प्राणके बिना शरीर और चन्द्रमाके बिना रात [निर्जीव तथा शोभाहीन हो जाती है], वैसे ही श्रीरामचन्द्रजीके बिना अयोध्या हो जायगी; हे भामिनी! तू अपने हृदयमें इस बातको समझ (विचारकर देख) तो सही।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 385 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जेहि भाँति सोकु कलंकु जाइ उपाय करि कुल पालही।
English explanation
AI draft: Take measures that will remove grief and disgrace, and protect the family.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस | by whichever |
| भाँति | रीति से | means or manner |
| सोकु | शोक | grief |
| कलंकु | कलंक | disgrace |
| जाइ | दूर हो जाए | may go away |
| उपाय | उपाय | remedial measures |
| करि | करके | having taken |
| कुल | कुल की | the family |
| पालही | रक्षा करो | protect |
2हठि फेरु रामहि जात बन जनि बात दूसरि चालही॥
English explanation
Insist on bringing Rama back as he leaves for the forest; do not raise any other proposal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हठि | हठपूर्वक आग्रह करके | with firm insistence |
| फेरु | लौटा लो | bring back |
| रामहि | राम को | Rama |
| जात | जाते हुए | going |
| बन | वन को | to the forest |
| जनि | मत | do not |
| बात | बात या प्रस्ताव | proposal or topic |
| दूसरि | दूसरी | another |
| चालही | चलाओ या उठाओ | raise or pursue |
3जिमि भानु बिनु दिनु प्रान बिनु तनु चंद बिनु जिमि जामिनी।
English explanation
As day is without the sun, the body without life, and night without the moon—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| भानु | सूर्य | the sun |
| बिनु | बिना | without |
| दिनु | दिन | day |
| प्रान | प्राणों | life |
| बिनु | बिना | without |
| तनु | शरीर | the body |
| चंद | चंद्रमा | the moon |
| बिनु | बिना | without |
| जिमि | जैसे | just as |
| जामिनी | रात | night |
4तिमि अवध तुलसीदास प्रभु बिनु समुझि धौं जियँ भामिनी॥
English explanation
Tulsidas says: Ayodhya will likewise be without Lord Rama; O lady, consider this in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिमि | उसी प्रकार | likewise |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| तुलसीदास | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| बिनु | बिना | without |
| समुझि | समझकर देखो | consider |
| धौं | तो भला | do, then |
| जियँ | अपने हृदय में | in your heart |
| भामिनी | हे भामिनी, हे कैकेयी | O lady, addressed to Kaikeyi |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 2.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 385
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 385, 385
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।