अयोध्याकाण्ड · दोहा 279 · दोहा/सोरठा
सादर सब कहँ रामगुर पठए भरि भरि भार।
सादर सब कहँ रामगुर पठए भरि भरि भार।
पूजि पितर सुर अतिथि गुर लगे करन फरहार।।279।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.279 · पुस्तक पृ. 576, 577
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सादर सब कहँ रामगुर पठए भरि भरि भार।
राम और गुरु ने आदरपूर्वक सबके पास इन खाद्य पदार्थों के भरपूर भार भेजे।
English explanation
Rama and the guru respectfully sent generous loads of these foods to everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सब | सब | everyone |
| कहँ | को | to |
| रामगुर | राम और गुरु ने | Rama and the guru |
| पठए | भेजे | sent |
| भरि | भरकर | filling |
| भरि | भरकर | filling fully |
| भार | भार; लदे हुए बोझ | loads |
2 पूजि पितर सुर अतिथि गुर लगे करन फरहार।।279।।
पितरों, देवताओं, अतिथियों और गुरु का पूजन करके सब फलाहार करने लगे।
English explanation
After honoring the ancestors, gods, guests, and guru, everyone began partaking of the fruit-and-root meal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूजि | पूजन करके | having honored |
| पितर | पितरों का | the ancestors |
| सुर | देवताओं का | the gods |
| अतिथि | अतिथियों का | the guests |
| गुर | गुरु का | the guru |
| लगे | लगे | began |
| करन | करने | to partake of |
| फरहार | फलाहार | a meal of fruits and roots |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 279
- स्रोत अभिलेख
- 2.279
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 576, 577
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