अयोध्याकाण्ड · दोहा 278 · दोहा/सोरठा
तेहि अवसर फल फूल दल मूल अनेक प्रकार।
तेहि अवसर फल फूल दल मूल अनेक प्रकार।
लइ आए बनचर बिपुल भरि भरि काँवरि भार।।278।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.278 · पुस्तक पृ. 575, 576
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तेहि अवसर फल फूल दल मूल अनेक प्रकार।
उस समय अनेक प्रकार के फल, फूल, पत्ते और कंद-मूल—
English explanation
At that time, fruits, flowers, leaves, and edible roots of many kinds—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| अवसर | समय पर | at the time |
| फल | फल | fruits |
| फूल | फूल | flowers |
| दल | पत्ते | leaves |
| मूल | कंद-मूल | edible roots and tubers |
| अनेक | अनेक | many |
| प्रकार | प्रकार के | of kinds |
2 लइ आए बनचर बिपुल भरि भरि काँवरि भार।।278।।
वनवासी काँवरों में भर-भरकर बड़ी मात्रा में उन वस्तुओं के भार ले आए।
English explanation
The forest dwellers brought those things in abundance, filling their shoulder-carried slings with loads.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लइ | लेकर | carrying |
| आए | आए | came |
| बनचर | वन में रहने वाले लोग | forest dwellers |
| बिपुल | बहुतायत में | in abundance |
| भरि | भरकर | filling |
| भरि | पूरा-पूरा भरकर | filling fully |
| काँवरि | काँवरों में; कंधे पर ढोने की बहँगियों में | in shoulder-carried slings |
| भार | बोझ; लदे हुए सामान | loads |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 278
- स्रोत अभिलेख
- 2.278
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 575, 576
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