अयोध्याकाण्ड · दोहा 277 · दोहा/सोरठा
दोउ समाज निमिराजु रघुराजु नहाने प्रात।
दोउ समाज निमिराजु रघुराजु नहाने प्रात।
बैठे सब बट बिटप तर मन मलीन कृस गात।।277।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.277 · पुस्तक पृ. 574, 575
भावार्थ और शब्दार्थ
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1दोउ समाज निमिराजु रघुराजु नहाने प्रात।
दोनों समाजों सहित विदेहराज जनक और रघुराज राम ने प्रातः स्नान किया।
English explanation
King Janaka and Rama, lord of the Raghu line, bathed in the morning together with both their companies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दोउ | दोनों | both |
| समाज | समूह; साथ आए समुदाय | companies; accompanying groups |
| निमिराजु | निमि के वंश के राजा जनक | Janaka, king of Nimi’s lineage |
| रघुराजु | रघुवंश के राजा श्रीराम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| नहाने | स्नान किया | bathed |
| प्रात | प्रातःकाल | in the morning |
2 बैठे सब बट बिटप तर मन मलीन कृस गात।।277।।
सब बरगद के वृक्ष के नीचे बैठ गए; उनके मन उदास और शरीर दुर्बल थे।
English explanation
Everyone sat beneath the banyan tree, their minds sorrowful and their bodies weakened.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| सब | सभी | everyone |
| बट | बरगद | banyan |
| बिटप | वृक्ष | tree |
| तर | नीचे | beneath |
| मन | मन | minds |
| मलीन | उदास; खिन्न | sorrowful; downcast |
| कृस | दुर्बल; कृश | weak; emaciated |
| गात | शरीर | bodies |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 277
- स्रोत अभिलेख
- 2.277
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 574, 575
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