अयोध्याकाण्ड · दोहा 24 · दोहा/सोरठा
साँस समय सानंद नृपु गयउ कैकेई गेहँ।
साँस समय सानंद नृपु गयउ कैकेई गेहँ।
गवनु निठुरता निकट किय जनु धरि देह सनेहँ।।24।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.24 · पुस्तक पृ. 363, 363
भावार्थ और शब्दार्थ
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1साँस समय सानंद नृपु गयउ कैकेई गेहँ।
संभावित पाठार्थ: संध्या के समय राजा दशरथ प्रसन्न होकर कैकेयी के भवन गए।
English explanation
Probable reading: In the evening, King Dasharatha went joyfully to Kaikeyi's residence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साँस | संभवतः संध्या | probably evening |
| समय | के समय | at the time of |
| सानंद | आनंद सहित | joyfully |
| नृपु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| गयउ | गए | went |
| कैकेई | कैकेयी के | Kaikeyi's |
| गेहँ | भवन में | to the residence |
2 गवनु निठुरता निकट किय जनु धरि देह सनेहँ।।24।।
मानो स्नेह ने शरीर धारण करके निष्ठुरता के पास गमन किया हो।
English explanation
It was as though affection had taken bodily form and approached cruelty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गवनु | गमन | a journey |
| निठुरता | निष्ठुरता के | of cruelty |
| निकट | पास | toward the presence |
| किय | किया | made |
| जनु | मानो | as though |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| देह | शरीर | a body |
| सनेहँ | स्नेह ने | affection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 24
- स्रोत अभिलेख
- 2.24
- सहायक विषय
- कैकेयीका कोपभवनमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 363, 363
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।