अयोध्याकाण्ड · सोरठा 25 · सोरठा
बार बार कह राउ सुमुखि सुलोचनि पिकबचनि।
मूल पाठ
बार बार कह राउ सुमुखि सुलोचनि पिकबचनि।
कारन मोहि सुनाउ गजगामिनि निज कोप कर॥ २५॥
स्रोत अभिलेख 2.25 · पुस्तक पृ. 364, 364
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा बार-बार कह रहे हैं—हे सुमुखी! हे सुलोचनी! हे कोकिलबयनी! हे गजगामिनी! मुझे अपने क्रोधका कारण तो सुना॥ २५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 365 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बार बार कह राउ सुमुखि सुलोचनि पिकबचनि।
English explanation
The king says repeatedly, “O lovely-faced lady, beautiful-eyed lady, whose speech is sweet as a cuckoo’s song!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार, फिर से | after time, again |
| कह | कहते हैं | says |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सुमुखि | हे सुंदर मुखवाली | O lovely-faced lady |
| सुलोचनि | हे सुंदर नेत्रोंवाली | O beautiful-eyed lady |
| पिकबचनि | हे कोयल जैसी मधुर वाणीवाली | O lady with cuckoo-sweet speech |
2कारन मोहि सुनाउ गजगामिनि निज कोप कर॥ २५॥
English explanation
“O lady with the stately gait of an elephant, tell me the reason for your anger.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कारन | कारण | reason |
| मोहि | मुझे | to me |
| सुनाउ | बताओ | tell |
| गजगामिनि | हे हाथिनी जैसी गरिमामयी चालवाली | O lady with an elephant’s stately gait |
| निज | अपने | your own |
| कोप | क्रोध | anger |
| कर | का | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- सोरठा 25
- स्रोत अभिलेख
- 2.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 365
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 364, 364
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।