अयोध्याकाण्ड · छंद · छंद
केहि हेतु रानि रिसानि परसत पानि पतिहि नेवारई।
मूल पाठ
केहि हेतु रानि रिसानि परसत पानि पतिहि नेवारई।
मानहुँ सरोष भुअंग भामिनि बिषम भाँति निहारई॥
दोउ बासना रसना दसन बर मरम ठाहरु देखई।
तुलसी नृपति भवतब्यता बस काम कौतुक लेखई॥
स्रोत अभिलेख 2.25 · पुस्तक पृ. 364, 364
भावार्थ
मूल पाठ के बाद'हे रानी! किसलिये रूठी हो? यह कहकर राजा उसे हाथसे स्पर्श करते हैं तो वह उनके हाथको [झटककर] हटा देती है और ऐसे देखती है मानो क्रोधमें भरी हुई नागिन क्रूर दृष्टिसे देख रही हो। दोनों [वरदानोंकी] वासनाएँ उस नागिनकी दो जीभें हैं और दोनों वरदान दाँत हैं; वह काटनेके लिये मर्मस्थान देख रही है। तुलसीदासजी कहते हैं कि राजा दशरथ होनहारके वशमें होकर इसे (इस प्रकार हाथ झटकने और नागिनकी भाँति देखनेको) कामदेवकी क्रीड़ा ही समझ रहे हैं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 364 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1केहि हेतु रानि रिसानि परसत पानि पतिहि नेवारई।
English explanation
AI-generated draft meaning: Why is the queen angry, drawing back from her husband as he touches her with his hand?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केहि | किस | what |
| हेतु | कारण से | for what reason |
| रानि | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
| रिसानि | क्रोधित हुई | has become angry |
| परसत | स्पर्श करते ही | upon touching |
| पानि | हाथ से | with the hand |
| पतिहि | अपने पति को | her husband |
| नेवारई | रोकती है | wards off |
2मानहुँ सरोष भुअंग भामिनि बिषम भाँति निहारई॥
English explanation
The lady looks with a fierce gaze, as though she were an enraged serpent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानहुँ | मानो | as though |
| सरोष | क्रोध से भरा | enraged |
| भुअंग | साँप | serpent |
| भामिनि | स्त्री, कैकेयी | the lady, Kaikeyi |
| बिषम | भयानक | fierce |
| भाँति | ढंग से | in a manner |
| निहारई | देखती है | gazes |
3दोउ बासना रसना दसन बर मरम ठाहरु देखई।
English explanation
Her two desires are like the serpent’s tongue, and the boons its fangs; she watches for a vulnerable spot to strike.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दोउ | दोनों | both |
| बासना | इच्छाएँ | desires |
| रसना | जीभ | tongue |
| दसन | दाँत | fangs |
| बर | वरदान | boons |
| मरम | मर्म, संवेदनशील | vital or vulnerable |
| ठाहरु | स्थान | spot |
| देखई | देखती है, ढूँढ़ती है | looks for |
4तुलसी नृपति भवतब्यता बस काम कौतुक लेखई॥
English explanation
Tulsidas says: under the sway of what is destined to happen, the king takes this for amorous play.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| नृपति | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| भवतब्यता | होनहार, जो होना निश्चित है | destiny, what is bound to happen |
| बस | के वश में | under the sway of |
| काम | प्रेम अथवा कामभाव का | amorous |
| कौतुक | खेल, क्रीड़ा | play |
| लेखई | समझते हैं | regards as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 2.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 364
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 364, 364
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।