अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी। अन अहिवातु सूच जनु भाबी।।
मूल पाठ
कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी। अन अहिवातु सूच जनु भाबी।।
जाइ निकट नृपु कह मृदु बानी। प्रानप्रिया केहि हेतु रिसानी।।
स्रोत अभिलेख 2.25 · पुस्तक पृ. 364, 364
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस दुर्बुद्धि कैकेयीको यह कुवेषता (बुरा वेष) कैसी फब रही है, मानो भावी विधवापनकी सूचना दे रही हो। राजा उसके पास जाकर कोमल वाणीसे बोले—हे प्राणप्रिये! किसलिये रिसाई (रूठी) हो?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 364 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी। अन अहिवातु सूच जनु भाबी।।
English explanation
How fitting that disheveled appearance was for the misguided woman—as though it foretold her coming widowhood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुमतिहि | दुर्बुद्धि वाली कैकेयी को | to the misguided Kaikeyi |
| कसि | कैसी | how |
| कुबेषता | बिगड़े वेश की दशा | disheveled appearance |
| फाबी | फब रही थी | suited her |
| अन | अभाव, नहीं | absence or negation |
| अहिवातु | पति के जीवित होने का सौभाग्य | the married felicity of having a living husband |
| सूच | सूचित करने वाली | indicating or foretelling |
| जनु | मानो | as though |
| भाबी | भविष्य में होने वाला | yet to come |
2 जाइ निकट नृपु कह मृदु बानी। प्रानप्रिया केहि हेतु रिसानी।।
English explanation
Going close, the king spoke gently: ‘Beloved, dear as my life, why are you angry?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर | having gone |
| निकट | पास | near |
| नृपु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कह | कहते हैं | says |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in words |
| प्रानप्रिया | हे प्राणों के समान प्रिय | O beloved, dear as life |
| केहि | किस | what |
| हेतु | कारण से | for reason |
| रिसानी | रूठी हो | are you angry |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 364
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 364, 364
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