अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा। केहि दुइ सिर केहि जमु चह लीन्हा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे प्रिये! किसने तेरा अनिष्ट किया? किसके दो सिर हैं? यमराज किसको लेना (अपने लोकको ले जाना) चाहते हैं ? कह, किस कंगालको राजा कर दूँ या किस राजाको देशसे निकाल दूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 365 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा। केहि दुइ सिर केहि जमु चह लीन्हा।।
कहु केहि रंकहि करौ नरेसू। कहु केहि नृपहि निकासौं देसू।।
स्रोत अभिलेख 2.26 · पुस्तक पृ. 365, 365
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा। केहि दुइ सिर केहि जमु चह लीन्हा।।
English explanation
AI draft: Beloved, who has harmed you? Who has two heads, and whom does Death wish to seize?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनहित | अहित; हानि | harm; injury |
| तोर | तुम्हारा | your |
| प्रिया | हे प्रिये | O beloved |
| केइँ | किसने | who |
| कीन्हा | किया | did; caused |
| केहि | किसके | whose; who has |
| दुइ | दो | two |
| सिर | सिर | heads |
| केहि | किसे | whom |
| जमु | यम; मृत्यु के देवता | Yama, the god of death |
| चह | चाहता है | wishes |
| लीन्हा | पकड़ना; ले लेना | to seize; take away |
2 कहु केहि रंकहि करौ नरेसू। कहु केहि नृपहि निकासौं देसू।।
English explanation
Tell me which pauper I should make king, and which king I should banish from the realm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहु | बताओ | tell me |
| केहि | किस | which |
| रंकहि | निर्धन को | pauper |
| करौ | मैं बना दूँ | should I make |
| नरेसू | राजा | king |
| कहु | बताओ | tell me |
| केहि | किस | which |
| नृपहि | राजा को | king |
| निकासौं | मैं निकाल दूँ | should I banish |
| देसू | देश से | from the realm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 365
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 365, 365
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।