अयोध्याकाण्ड · दोहा 249 · दोहा/सोरठा
सरनि सरोरुह जल बिहग कूजत गुंजत भृंग।
सरनि सरोरुह जल बिहग कूजत गुंजत भृंग।
बैर बिगत बिहरत बिपिन मृग बिहंग बहुरंग।।249।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.249 · पुस्तक पृ. 551, 551
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सरनि सरोरुह जल बिहग कूजत गुंजत भृंग।
सरोवरों में कमल हैं; जलपक्षी कूज रहे हैं और भौंरे गुंजार कर रहे हैं।
English explanation
Lotuses bloom in the lakes; waterbirds call, and bees hum.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरनि | सरोवरों में | in the lakes |
| सरोरुह | कमल | lotuses |
| जल | जल में रहने वाले | water-dwelling |
| बिहग | पक्षी | birds |
| कूजत | कूजते हैं | call melodiously |
| गुंजत | गुंजार करते हैं | hum |
| भृंग | भौंरे | bees |
2 बैर बिगत बिहरत बिपिन मृग बिहंग बहुरंग।।249।।
अनेक रंगों और प्रकारों के पशु-पक्षी वैर से रहित होकर वन में विचरते हैं।
English explanation
Animals and birds of many colors and kinds roam the forest free from enmity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैर | वैर | enmity |
| बिगत | रहित; मिटा हुआ | absent; gone |
| बिहरत | विचरते हैं | roam |
| बिपिन | वन में | in the forest |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| बिहंग | पक्षी | birds |
| बहुरंग | अनेक रंगों और प्रकारों के | of many colors and kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 249
- स्रोत अभिलेख
- 2.249
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 551, 551
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