अयोध्याकाण्ड · दोहा 248 · दोहा/सोरठा
धर्म सेतु करुनायतन कस न कहहु अस राम।
धर्म सेतु करुनायतन कस न कहहु अस राम।
लोग दुखित दिन दुइ दरस देखि लहहुँ बिश्राम।।248।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.248 · पुस्तक पृ. 550, 550
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1धर्म सेतु करुनायतन कस न कहहु अस राम।
हे राम, धर्म के रक्षक और करुणा के धाम, आप ऐसा क्यों न कहें?
English explanation
Rama, guardian of righteousness and abode of compassion, why would you not speak thus?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धर्म | धर्म के | of righteousness |
| सेतु | रक्षक | guardian |
| करुनायतन | करुणा के धाम | abode of compassion |
| कस | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| कहहु | आप कहें | would you say |
| अस | ऐसा | thus |
| राम | हे राम | O Rama |
2 लोग दुखित दिन दुइ दरस देखि लहहुँ बिश्राम।।248।।
लोग दुखी हैं; दो दिन आपके दर्शन करके वे शांति पा लें।
English explanation
The people are distressed; let them find solace by beholding you for two days.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोग | लोग | the people |
| दुखित | दुखी हैं | are distressed |
| दिन | दिन | days |
| दुइ | दो | two |
| दरस | आपके दर्शन | the sight of you |
| देखि | करके | by beholding |
| लहहुँ | वे पा लें | let them obtain |
| बिश्राम | शांति और सांत्वना | rest and solace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 248
- स्रोत अभिलेख
- 2.248
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 550, 550
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।