अयोध्याकाण्ड · दोहा 247 · दोहा/सोरठा
भोरु भएँ रघुनंदनहि जो मुनि आयसु दीन्ह।।
भोरु भएँ रघुनंदनहि जो मुनि आयसु दीन्ह।।
श्रद्धा भगति समेत प्रभु सो सबु सादरु कीन्ह।।247।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.247 · पुस्तक पृ. 549, 550
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भोरु भएँ रघुनंदनहि जो मुनि आयसु दीन्ह।।
प्रातःकाल होने पर मुनि ने राम को जो आदेश दिया—
English explanation
At daybreak, whatever instructions the sage gave Rama—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भोरु | प्रातःकाल | daybreak |
| भएँ | होने पर | when it came |
| रघुनंदनहि | रघुवंश को आनंद देने वाले राम को | to Rama, joy of Raghu’s lineage |
| जो | जो भी | whatever |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ ने | the sage Vasishtha |
| आयसु | आदेश | instructions |
| दीन्ह | दिया | gave |
2 श्रद्धा भगति समेत प्रभु सो सबु सादरु कीन्ह।।247।।
प्रभु राम ने वह सब श्रद्धा और भक्ति के साथ आदरपूर्वक किया।
English explanation
Lord Rama carried out all of it respectfully, with faith and devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रद्धा | श्रद्धा | faith |
| भगति | भक्ति | devotion |
| समेत | के साथ | with |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| सो | वह | that |
| सबु | सब | all |
| सादरु | आदरपूर्वक | respectfully |
| कीन्ह | किया | carried out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 247
- स्रोत अभिलेख
- 2.247
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 549, 550
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