अयोध्याकाण्ड · दोहा 246 · दोहा/सोरठा
लागि लागि पग सबनि सिय भेंटति अति अनुराग।।
लागि लागि पग सबनि सिय भेंटति अति अनुराग।।
हृदयँ असीसहिं पेम बस रहिअहु भरी सोहाग।।246।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.246 · पुस्तक पृ. 548, 549
भावार्थ और शब्दार्थ
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1लागि लागि पग सबनि सिय भेंटति अति अनुराग।।
सीता सबके चरणों में बार-बार प्रणाम करती हुई अत्यंत प्रेम से उनसे मिल रही थीं।
English explanation
Bowing repeatedly at everyone’s feet, Sita met them with deep affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लागि | प्रणाम करके | bowing |
| लागि | बार-बार प्रणाम करके | bowing repeatedly |
| पग | चरणों में | at the feet |
| सबनि | सभी के | of everyone |
| सिय | सीता | Sita |
| भेंटति | मिल रही थीं | was meeting them |
| अति | अत्यंत | deep |
| अनुराग | प्रेम से | with affection |
2 हृदयँ असीसहिं पेम बस रहिअहु भरी सोहाग।।246।।
वे प्रेम के वश होकर हृदय से आशीर्वाद देती थीं: तुम सदा सौभाग्य से परिपूर्ण रहो।
English explanation
Overcome with love, they blessed her from their hearts: May you remain blessed with lasting married felicity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हृदयँ | हृदय से | from their hearts |
| असीसहिं | आशीर्वाद देती हैं | give blessings |
| पेम | प्रेम के | of love |
| बस | वश में | under the sway |
| रहिअहु | तुम बनी रहो | may you remain |
| भरी | परिपूर्ण | filled |
| सोहाग | वैवाहिक सौभाग्य से | with married felicity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 246
- स्रोत अभिलेख
- 2.246
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 548, 549
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