अयोध्याकाण्ड · दोहा 73 · दोहा/सोरठा
समुझि सुमित्राँ राम सिय रूप सुसीलु सुभाउ।
समुझि सुमित्राँ राम सिय रूप सुसीलु सुभाउ।
नृप सनेहु लखि धुनेउ सिरु पापिनि दीन्ह कुदाउ।।73।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.73 · पुस्तक पृ. 403, 404
भावार्थ और शब्दार्थ
1समुझि सुमित्राँ राम सिय रूप सुसीलु सुभाउ।
सुमित्रा ने राम और सीता के रूप तथा उनके सुशील स्वभाव का विचार किया।
English explanation
Sumitra reflected on Rama and Sita’s beauty and their virtuous disposition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | विचार करके; स्मरण करके | reflecting on; recalling |
| सुमित्राँ | सुमित्रा ने; लक्ष्मण की माता ने | Sumitra, Lakshmana’s mother |
| राम | राम के | Rama’s |
| सिय | सीता के | Sita’s |
| रूप | रूप; सुंदरता | appearance; beauty |
| सुसीलु | सुशील; सदाचारी | virtuous; gentle |
| सुभाउ | स्वभाव | disposition |
2 नृप सनेहु लखि धुनेउ सिरु पापिनि दीन्ह कुदाउ।।73।।
राजा दशरथ का स्नेह देखकर सुमित्रा ने सिर पीटा—पापिनी कैकेयी ने बुरा दाँव चला है।
English explanation
Considering King Dasharatha’s affection, Sumitra beat her head in distress: sinful Kaikeyi had played a wicked move.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा दशरथ का | King Dasharatha’s |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| लखि | देखकर; विचार करके | observing; considering |
| धुनेउ | पीटा; दुःख से धुना | beat in distress |
| सिरु | सिर | head |
| पापिनि | पापिनी कैकेयी ने | sinful Kaikeyi |
| दीन्ह | दिया; चला | made; played |
| कुदाउ | बुरा दाँव; कपटपूर्ण चाल | a wicked move; treacherous gambit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 73
- स्रोत अभिलेख
- 2.73
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 403, 404
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।