अयोध्याकाण्ड · दोहा 74 · दोहा/सोरठा
भूरि भाग भाजनु भयहु मोहि समेत बलि जाउँ।
भूरि भाग भाजनु भयहु मोहि समेत बलि जाउँ।
जौम तुम्हरें मन छाड़ि छलु कीन्ह राम पद ठाउँ।।74।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.74 · पुस्तक पृ. 404, 405
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भूरि भाग भाजनु भयहु मोहि समेत बलि जाउँ।
तुम मेरे सहित बड़े सौभाग्य के पात्र हुए हो; मैं तुम पर बलिहारी जाती हूँ।
English explanation
You, together with me, have become recipients of great good fortune; I offer myself in loving devotion to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूरि | बहुत बड़ा | abundant |
| भाग | सौभाग्य | good fortune |
| भाजनु | पात्र | recipient |
| भयहु | तुम हुए हो | you have become |
| मोहि | मुझे; यहाँ मेरे | me; here, myself |
| समेत | सहित | together with |
| बलि | बलिहारी | a loving offering of oneself |
| जाउँ | मैं जाती हूँ | I offer myself |
2 जौम तुम्हरें मन छाड़ि छलु कीन्ह राम पद ठाउँ।।74।।
यदि तुम्हारे मन ने छल छोड़कर राम के चरणों में स्थान बना लिया है।
English explanation
If your mind has abandoned deceit and made its dwelling at Rama's feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौम | यदि | if |
| तुम्हरें | तुम्हारे | your |
| मन | मन ने | mind |
| छाड़ि | छोड़कर | having abandoned |
| छलु | छल या कपट | deceit |
| कीन्ह | बनाया है | has made |
| राम | श्रीराम के | Rama's |
| पद | चरणों में | at the feet |
| ठाउँ | स्थान या आश्रय | a dwelling or refuge |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 74
- स्रोत अभिलेख
- 2.74
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 404, 405
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।