अयोध्याकाण्ड · दोहा 149 · दोहा/सोरठा
सखा रामु सिय लखनु जहँ तहाँ मोहि पहुँचाउ।
सखा रामु सिय लखनु जहँ तहाँ मोहि पहुँचाउ।
नाहिं त चाहत चलन अब प्रान कहउँ सतिभाउ।।149।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.149 · पुस्तक पृ. 467, 468
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सखा रामु सिय लखनु जहँ तहाँ मोहि पहुँचाउ।
हे मित्र, जहाँ राम, सीता और लक्ष्मण हैं, वहाँ मुझे पहुँचा दो।
English explanation
Friend, take me to where Rama, Sita, and Lakshmana are.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखा | हे मित्र | O friend |
| रामु | राम | Rama |
| सिय | सीता | Sita |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana |
| जहँ | जहाँ हैं | where they are |
| तहाँ | वहाँ | there |
| मोहि | मुझे | me |
| पहुँचाउ | पहुँचा दो | take me |
2 नाहिं त चाहत चलन अब प्रान कहउँ सतिभाउ।।149।।
नहीं तो अब मेरे प्राण निकलना चाहते हैं; मैं सच कहता हूँ।
English explanation
Otherwise, my life is now about to depart; I speak in all sincerity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाहिं | नहीं; ऐसा न होने पर | if not |
| त | तो | then |
| चाहत | चाहते हैं; तत्पर हैं | are ready to |
| चलन | चले जाना; निकलना | depart |
| अब | अब | now |
| प्रान | मेरे प्राण | my life; vital breath |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| सतिभाउ | सच्चे भाव से; सचमुच | in all sincerity; truly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 149
- स्रोत अभिलेख
- 2.149
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 467, 468
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।