अयोध्याकाण्ड · दोहा 148 · दोहा/सोरठा
देखि सचिवँ जय जीव कहि कीन्हेउ दंड प्रनामु।
देखि सचिवँ जय जीव कहि कीन्हेउ दंड प्रनामु।
सुनत उठेउ ब्याकुल नृपति कहु सुमंत्र कहँ रामु।।148।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.148 · पुस्तक पृ. 466, 467
भावार्थ और शब्दार्थ
1देखि सचिवँ जय जीव कहि कीन्हेउ दंड प्रनामु।
राजा को देखकर मंत्री ने ‘आपकी जय हो, आप दीर्घायु हों’ कहकर दंडवत प्रणाम किया।
English explanation
Seeing the king, the minister said, “Victory to you; may you live long,” and prostrated himself in greeting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| सचिवँ | मंत्री सुमंत्र ने | the minister Sumantra |
| जय | आपकी जय हो | victory to you |
| जीव | दीर्घायु हों | may you live long |
| कहि | कहकर | having said |
| कीन्हेउ | किया | performed |
| दंड | दंडवत, सीधा लेटकर | prostrate, stretched out straight |
| प्रनामु | प्रणाम | obeisance |
2 सुनत उठेउ ब्याकुल नृपति कहु सुमंत्र कहँ रामु।।148।।
सुनते ही व्याकुल राजा उठे और बोले, ‘सुमंत्र, बताओ, राम कहाँ हैं?’
English explanation
Hearing this, the distraught king rose and said, “Sumantra, tell me, where is Rama?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| उठेउ | उठे | rose |
| ब्याकुल | व्याकुल | distraught |
| नृपति | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कहु | बताओ | tell me |
| सुमंत्र | हे मंत्री सुमंत्र | O Sumantra, the minister |
| कहँ | कहाँ | where |
| रामु | राम हैं | is Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 148
- स्रोत अभिलेख
- 2.148
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 466, 467
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।