अयोध्याकाण्ड · दोहा 133 · दोहा/सोरठा
लखन जानकी सहित प्रभु राजत रुचिर निकेत।
लखन जानकी सहित प्रभु राजत रुचिर निकेत।
सोह मदनु मुनि बेष जनु रति रितुराज समेत।।133।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.133 · पुस्तक पृ. 454, 455
भावार्थ और शब्दार्थ
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1लखन जानकी सहित प्रभु राजत रुचिर निकेत।
सुंदर निवास में लक्ष्मण और सीता के साथ प्रभु राम सुशोभित हैं।
English explanation
Lord Rama shines in the lovely dwelling with Lakshmana and Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| सहित | के साथ | with |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| राजत | सुशोभित हैं | shines; appears splendid |
| रुचिर | सुंदर | lovely |
| निकेत | निवास में | in the dwelling |
2 सोह मदनु मुनि बेष जनु रति रितुराज समेत।।133।।
मानो मुनि के वेश में कामदेव, रति और ऋतुराज वसंत के साथ सुशोभित हों।
English explanation
It is as though the god of love, dressed as a sage, shines there with Rati and spring, the king of seasons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोह | सुशोभित हों | shines; looks splendid |
| मदनु | कामदेव, प्रेम के देवता | the god of love |
| मुनि | मुनि का | of a sage |
| बेष | वेश धारण किए | dressed in the guise |
| जनु | मानो | as though |
| रति | कामदेव की पत्नी रति | Rati, the god of love’s consort |
| रितुराज | ऋतुओं का राजा वसंत | spring, the king of seasons |
| समेत | के साथ | together with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 133
- स्रोत अभिलेख
- 2.133
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 454, 455
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