अयोध्याकाण्ड · दोहा 162 · दोहा/सोरठा
राम बिरोधी हृदय तें प्रगट कीन्ह बिधि मोहि।
राम बिरोधी हृदय तें प्रगट कीन्ह बिधि मोहि।
मो समान को पातकी बादि कहउँ कछु तोहि।।162।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.162 · पुस्तक पृ. 478, 478
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1राम बिरोधी हृदय तें प्रगट कीन्ह बिधि मोहि।
विधाता ने मुझे राम-विरोधी हृदय से जन्म दिया।
English explanation
The Creator brought me forth from a heart hostile to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | to Rama |
| बिरोधी | विरोधी | hostile |
| हृदय | हृदय | heart |
| तें | से | from |
| प्रगट | उत्पन्न | born |
| कीन्ह | किया | made |
| बिधि | विधाता ने | the Creator |
| मोहि | मुझे | me |
2 मो समान को पातकी बादि कहउँ कछु तोहि।।162।।
मेरे समान पापी कौन है? मैं व्यर्थ ही तुझसे कुछ कह रहा हूँ।
English explanation
Who is as sinful as I am? It is in vain that I say anything to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मो | मेरे | me |
| समान | समान | like |
| को | कौन | who |
| पातकी | पापी | sinner |
| बादि | व्यर्थ | in vain |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| कछु | कुछ | anything |
| तोहि | तुझसे | to you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 162
- स्रोत अभिलेख
- 2.162
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 478, 478
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