अयोध्याकाण्ड · दोहा 163 · दोहा/सोरठा
मलिन बसन बिबरन बिकल कृस सरीर दुख भार।
मलिन बसन बिबरन बिकल कृस सरीर दुख भार।
कनक कलप बर बेलि बन मानहुँ हनी तुसार।।163।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.163 · पुस्तक पृ. 478, 479
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मलिन बसन बिबरन बिकल कृस सरीर दुख भार।
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2 कनक कलप बर बेलि बन मानहुँ हनी तुसार।।163।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 163
- स्रोत अभिलेख
- 2.163
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 478, 479
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