अयोध्याकाण्ड · दोहा 161 · दोहा/सोरठा
हंसबंसु दसरथु जनकु राम लखन से भाइ।
हंसबंसु दसरथु जनकु राम लखन से भाइ।
जननी तूँ जननी भई बिधि सन कछु न बसाइ।।161।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.161 · पुस्तक पृ. 477, 477
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1हंसबंसु दसरथु जनकु राम लखन से भाइ।
मेरा वंश सूर्यवंश है, पिता दशरथ हैं और राम-लक्ष्मण जैसे भाई हैं।
English explanation
Mine is the solar dynasty, Dasharatha is my father, and I have brothers such as Rama and Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हंसबंसु | सूर्यवंश | the solar dynasty |
| दसरथु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| जनकु | पिता | father |
| राम | राम | Rama, Bharata's brother |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Bharata's brother |
| से | जैसे | such as |
| भाइ | भाई | brothers |
2 जननी तूँ जननी भई बिधि सन कछु न बसाइ।।161।।
हे माँ, तू मेरी जननी हुई; विधाता के सामने किसी का कुछ वश नहीं चलता।
English explanation
Mother, you became my mother; no one has any power against fate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जननी | हे माँ | O mother |
| तूँ | तू | you |
| जननी | मेरी माँ | my mother |
| भई | हुई | became |
| बिधि | विधाता | the ordainer of fate |
| सन | के सामने | against |
| कछु | कुछ भी | any |
| न | नहीं | no |
| बसाइ | वश चलता | power can prevail |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 161
- स्रोत अभिलेख
- 2.161
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 477, 477
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