अयोध्याकाण्ड · दोहा 108 · दोहा/सोरठा
राम कीन्ह बिश्राम निसि प्रात प्रयाग नहाइ।
राम कीन्ह बिश्राम निसि प्रात प्रयाग नहाइ।
चले सहित सिय लखन जन मुददित मुनिहि सिरु नाइ।।108।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.108 · पुस्तक पृ. 433, 433
भावार्थ और शब्दार्थ
1राम कीन्ह बिश्राम निसि प्रात प्रयाग नहाइ।
राम ने रात में विश्राम किया और प्रातः प्रयाग में स्नान करके—
English explanation
Rama rested for the night and, after bathing at Prayag in the morning—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| कीन्ह | किया | took |
| बिश्राम | विश्राम | rest |
| निसि | रात में | at night |
| प्रात | सुबह | in the morning |
| प्रयाग | प्रयाग में | at Prayag |
| नहाइ | स्नान करके | having bathed |
2 चले सहित सिय लखन जन मुददित मुनिहि सिरु नाइ।।108।।
मुनि को सिर झुकाकर प्रणाम करके सीता और लक्ष्मण के साथ चले; लोग प्रसन्न थे। ‘मुददित’ को संभावित ‘मुदित’ के अर्थ में पढ़ने पर यह भाव बनता है।
English explanation
Bowing his head to the sage, Rama departed with Sita and Lakshmana, while the people rejoiced. This reading takes the uncertain form ‘मुददित’ as likely meaning ‘joyful.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | departed |
| सहित | साथ | together with |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| जन | लोग | the people |
| मुददित | प्रसन्न | joyful |
| मुनिहि | मुनि को | to the sage |
| सिरु | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 108
- स्रोत अभिलेख
- 2.108
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 433, 433
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।