अयोध्याकाण्ड · दोहा 18 · दोहा/सोरठा
रचि पचि कोटिक कुटिलपन कीन्हेसि कपट प्रबोधु।।
रचि पचि कोटिक कुटिलपन कीन्हेसि कपट प्रबोधु।।
कहिसि कथा सत सवति कै जेहि बिधि बाढ़ बिरोधु।।18।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.18 · पुस्तक पृ. 358, 359
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रचि पचि कोटिक कुटिलपन कीन्हेसि कपट प्रबोधु।।
मंथरा ने करोड़ों कुटिल युक्तियाँ सोच-विचारकर छलपूर्ण समझाइश दी।
English explanation
Carefully contriving countless crooked devices, Manthara offered deceitful counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रचि | रचकर; योजना बनाकर | devising |
| पचि | बहुत सोच-विचारकर | laboring over; pondering |
| कोटिक | करोड़ों; असंख्य | millions of; countless |
| कुटिलपन | कुटिल युक्तियाँ | crooked devices |
| कीन्हेसि | उसने किया | she gave; she made |
| कपट | छलपूर्ण | deceitful |
| प्रबोधु | समझाइश; उपदेश | counsel; persuasion |
2 कहिसि कथा सत सवति कै जेहि बिधि बाढ़ बिरोधु।।18।।
उसने सौतों की सैकड़ों कथाएँ इस तरह सुनाईं कि विरोध बढ़े।
English explanation
She told hundreds of stories about co-wives in a manner calculated to increase hostility.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहिसि | उसने कहा; सुनाया | she told |
| कथा | कथाएँ | stories |
| सत | सौ; सैकड़ों | a hundred; hundreds |
| सवति | सौतों; सहपत्नियों | co-wives |
| कै | की | of; about |
| जेहि | जिस | in which |
| बिधि | रीति; तरह | manner |
| बाढ़ | बढ़े | would increase |
| बिरोधु | विरोध; वैर | hostility; antagonism |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 18
- स्रोत अभिलेख
- 2.18
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 358, 359
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