अयोध्याकाण्ड · दोहा 220 · दोहा/सोरठा
रघुबर बरन बिलोकि बर बारि समेत समाज।
रघुबर बरन बिलोकि बर बारि समेत समाज।
होत मगन बारिधि बिरह चढ़े बिबेक जहाज।।220।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 526, 527
भावार्थ और शब्दार्थ
1रघुबर बरन बिलोकि बर बारि समेत समाज।
श्रीराम के वर्ण जैसा सुंदर जल देखकर भरत पूरे समाज सहित विरह से भर उठे—आगे की पंक्ति में इसी दशा का वर्णन है।
English explanation
Seeing the beautiful water resembling Rama’s complexion, Bharata and the entire company were overcome with longing—the next line completes the description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम के | of Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| बरन | वर्ण जैसा | resembling the complexion |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| बर | सुंदर | beautiful |
| बारि | जल | water |
| समेत | सहित | together with |
| समाज | पूरे समाज के | the entire company |
2 होत मगन बारिधि बिरह चढ़े बिबेक जहाज।।220।।
वे विरह के समुद्र में डूबने लगे, फिर विवेक के जहाज पर चढ़कर सँभले।
English explanation
They began sinking in the ocean of separation, then steadied themselves by boarding the ship of discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होत | होते हुए | becoming |
| मगन | डूबते हुए | immersed |
| बारिधि | समुद्र में | in the ocean |
| बिरह | विरह के | of separation |
| चढ़े | चढ़े | boarded |
| बिबेक | विवेक रूपी | of discernment |
| जहाज | जहाज पर | the ship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 220
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 526, 527
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।