अयोध्याकाण्ड · दोहा 221 · दोहा/सोरठा
मगबासी नर नारि सुनि धाम काम तजि धाइ।
मगबासी नर नारि सुनि धाम काम तजि धाइ।
देखि सरूप सनेह सब मुदित जनम फलु पाइ।।221।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.221 · पुस्तक पृ. 527, 528
भावार्थ और शब्दार्थ
1मगबासी नर नारि सुनि धाम काम तजि धाइ।
मार्ग में रहने वाले स्त्री-पुरुष उनके आने की खबर सुनकर घर और काम छोड़कर दौड़ पड़े।
English explanation
Hearing of their arrival, the men and women living along the route left their homes and work and hurried out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मगबासी | मार्ग के किनारे रहने वाले | those living along the route |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| धाम | घर | homes |
| काम | कामकाज | work |
| तजि | छोड़कर | leaving behind |
| धाइ | दौड़ पड़े | hurried out |
2 देखि सरूप सनेह सब मुदित जनम फलु पाइ।।221।।
उनका सुंदर रूप और प्रेम देखकर सब अपने जन्म का फल प्राप्त कर प्रसन्न हो गए।
English explanation
Seeing their beautiful appearance and affection, everyone rejoiced, having attained the fulfillment of their birth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| सरूप | सुंदर रूप | beautiful appearance |
| सनेह | प्रेम | affection; love |
| सब | सभी | everyone |
| मुदित | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| जनम | जन्म का | of birth; of life |
| फलु | फल; सार्थकता | fruit; fulfillment |
| पाइ | प्राप्त करके | having attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 221
- स्रोत अभिलेख
- 2.221
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 527, 528
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।