अयोध्याकाण्ड · दोहा 222 · दोहा/सोरठा
चलत पयादें खात फल पिता दीन्ह तजि राजु।
चलत पयादें खात फल पिता दीन्ह तजि राजु।
जात मनावन रघुबरहि भरत सरिस को आजु।।222।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.222 · पुस्तक पृ. 528, 528
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1चलत पयादें खात फल पिता दीन्ह तजि राजु।
पिता का दिया हुआ राज्य छोड़कर भरत पैदल चलते हैं और फल खाते हैं।
English explanation
Having renounced the kingdom bestowed by his father, Bharata travels on foot and eats fruit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलत | चलते हैं | travels |
| पयादें | पैदल | on foot |
| खात | खाते हैं | eats |
| फल | फल | fruit |
| पिता | पिता द्वारा | by his father |
| दीन्ह | दिया हुआ | bestowed |
| तजि | त्यागकर | having renounced |
| राजु | राज्य | the kingdom |
2 जात मनावन रघुबरहि भरत सरिस को आजु।।222।।
वे श्रीराम को मनाने जा रहे हैं; आज भरत के समान कौन है?
English explanation
He is going to persuade Rama to return; who today is equal to Bharata?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जात | जा रहे हैं | is going |
| मनावन | मनाने; लौटने के लिए राजी करने | to persuade to return |
| रघुबरहि | श्रीराम को, रघुकुल के श्रेष्ठ पुरुष को | Rama, the foremost of Raghu’s lineage |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| सरिस | समान | equal to |
| को | कौन | who |
| आजु | आज | today |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 222
- स्रोत अभिलेख
- 2.222
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 528, 528
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