अयोध्याकाण्ड · दोहा 223 · दोहा/सोरठा
भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह कर भागु।
भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह कर भागु।
जनु सिंघलबासिन्ह भयउ बिधि बस सुलभ प्रयागु।।223।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.223 · पुस्तक पृ. 529, 529
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह कर भागु।
भरत का दर्शन करते ही मार्ग के लोगों का भाग्य खुल गया।
English explanation
At the sight of Bharata, the good fortune of the people along the road blossomed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत का | of Bharata |
| दरसु | दर्शन | sight; blessed encounter |
| देखत | देखते ही | upon seeing |
| खुलेउ | खुल गया; उदय हुआ | opened up; blossomed |
| मग | मार्ग के | along the road |
| लोगन्ह | लोगों | the people |
| कर | का | of |
| भागु | भाग्य | good fortune |
2 जनु सिंघलबासिन्ह भयउ बिधि बस सुलभ प्रयागु।।223।।
मानो विधाता की व्यवस्था से सिंहल के निवासियों को प्रयाग सहज उपलब्ध हो गया हो।
English explanation
It was as though, by Providence’s arrangement, Prayaga had become readily accessible to the inhabitants of Sinhala.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनु | मानो | as though |
| सिंघलबासिन्ह | सिंहल द्वीप के निवासियों को | to the inhabitants of Sinhala island |
| भयउ | हो गया | had become |
| बिधि | विधाता के | of Providence |
| बस | वश; व्यवस्था से | through the agency of |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily accessible |
| प्रयागु | प्रयाग, पवित्र तीर्थस्थल | Prayaga, the sacred pilgrimage place |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 223
- स्रोत अभिलेख
- 2.223
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 529, 529
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