अयोध्याकाण्ड · दोहा 264 · दोहा/सोरठा
मनु प्रसन्न करि सकुच तजि कहहु करौं सोइ आजु।
मनु प्रसन्न करि सकुच तजि कहहु करौं सोइ आजु।
सत्यसंध रघुबर बचन सुनि भा सुखी समाजु।।264।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.264 · पुस्तक पृ. 563, 564
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मनु प्रसन्न करि सकुच तजि कहहु करौं सोइ आजु।
मन प्रसन्न करके और संकोच छोड़कर कहो; मैं आज वही करूँगा।
English explanation
Make your heart glad, put aside hesitation, and speak; I will do that very thing today.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनु | मन | your heart |
| प्रसन्न | प्रसन्न | glad |
| करि | करके | having made |
| सकुच | संकोच | hesitation |
| तजि | छोड़कर | having set aside |
| कहहु | कहो | speak |
| करौं | मैं करूँगा | I will do |
| सोइ | वही | that very thing |
| आजु | आज | today |
2 सत्यसंध रघुबर बचन सुनि भा सुखी समाजु।।264।।
सत्यप्रतिज्ञ रघुश्रेष्ठ राम के वचन सुनकर सारी सभा सुखी हो गई।
English explanation
Hearing the words of Rama, foremost of Raghu’s line and steadfast in his promises, the assembly became happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्यसंध | सत्यप्रतिज्ञ | steadfast in his promises |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu’s line |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| भा | हो गया | became |
| सुखी | सुखी | happy |
| समाजु | सभा | the assembly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 264
- स्रोत अभिलेख
- 2.264
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 563, 564
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।