अयोध्याकाण्ड · दोहा 263 · दोहा/सोरठा
मिटिहहिं पाप प्रपंच सब अखिल अमंगल भार।
मिटिहहिं पाप प्रपंच सब अखिल अमंगल भार।
लोक सुजसु परलोक सुखु सुमिरत नामु तुम्हार।।263।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.263 · पुस्तक पृ. 563, 563
भावार्थ और शब्दार्थ
1मिटिहहिं पाप प्रपंच सब अखिल अमंगल भार।
तुम्हारा नाम स्मरण करने से सारे पाप, प्रपंच और समस्त अमंगल का भार मिट जाएगा।
English explanation
By remembering your name, all sins, deceptive entanglements, and the entire burden of misfortune will disappear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिटिहहिं | मिट जाएँगे | will disappear |
| पाप | पाप | sins |
| प्रपंच | छल-कपट; उलझाव | deception; entanglements |
| सब | सभी | all |
| अखिल | समस्त | entire |
| अमंगल | अमंगल; अनिष्ट का | of misfortune |
| भार | भार | burden |
2 लोक सुजसु परलोक सुखु सुमिरत नामु तुम्हार।।263।।
तुम्हारा नाम स्मरण करने से इस लोक में उत्तम यश और परलोक में सुख प्राप्त होगा।
English explanation
Remembering your name will bring good renown in this world and happiness in the hereafter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोक | इस लोक में | in this world |
| सुजसु | उत्तम यश | good renown |
| परलोक | परलोक में | in the hereafter |
| सुखु | सुख | happiness |
| सुमिरत | स्मरण करने से | by remembering |
| नामु | नाम | name |
| तुम्हार | तुम्हारा; भरत का | your; Bharata’s |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 263
- स्रोत अभिलेख
- 2.263
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 563, 563
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।