अयोध्याकाण्ड · दोहा 289 · दोहा/सोरठा
भोरेहुँ भरत न पेलिहहिं मनसहुँ राम रजाइ।
भोरेहुँ भरत न पेलिहहिं मनसहुँ राम रजाइ।
करिअ न सोचु सनेह बस कहेउ भूप बिलखाइ।।289।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.289 · पुस्तक पृ. 585, 586
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भोरेहुँ भरत न पेलिहहिं मनसहुँ राम रजाइ।
भरत भूल से भी, मन में भी, राम की आज्ञा का उल्लंघन नहीं करेंगे।
English explanation
Bharata will not disregard Rama’s command, even inadvertently or in thought.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भोरेहुँ | भूल से भी | even inadvertently |
| भरत | भरत | Bharata |
| न | नहीं | not |
| पेलिहहिं | उल्लंघन करेंगे; टालेंगे | will disregard or overstep |
| मनसहुँ | मन में भी | even in thought |
| राम | राम की | Rama’s |
| रजाइ | आज्ञा; इच्छा | command; will |
2 करिअ न सोचु सनेह बस कहेउ भूप बिलखाइ।।289।।
चिंता मत कीजिए—राजा ने स्नेह के वश होकर बिलखते हुए कहा।
English explanation
“Do not worry,” said the king, sobbing, overcome with affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करिअ | कीजिए | please do |
| न | नहीं; मत | not; do not |
| सोचु | चिंता | worry |
| सनेह | स्नेह के | of affection |
| बस | वश में | under the sway |
| कहेउ | कहा | said |
| भूप | राजा जनक ने | King Janaka |
| बिलखाइ | बिलखते हुए | sobbing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 289
- स्रोत अभिलेख
- 2.289
- सहायक विषय
- जनक-सुनयना-संवाद, भरतजीकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 585, 586
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।