अयोध्याकाण्ड · दोहा 62 · दोहा/सोरठा
भूमि सयन बलकल बसन असनु कंद फल मूल।
भूमि सयन बलकल बसन असनु कंद फल मूल।
ते कि सदा सब दिन मिलिहिं सबुइ समय अनुकूल।।62।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.62 · पुस्तक पृ. 395, 395
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भूमि सयन बलकल बसन असनु कंद फल मूल।
धरती पर सोना, पेड़ की छाल के वस्त्र पहनना और कंद, फल तथा जड़ें खाना होगा।
English explanation
One must sleep on the ground, wear bark garments, and eat tubers, fruits, and roots.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूमि | धरती पर | on the ground |
| सयन | सोना; शयन | sleeping |
| बलकल | पेड़ की छाल के | of tree bark |
| बसन | वस्त्र | garments |
| असनु | भोजन | food |
| कंद | कंद | tubers |
| फल | फल | fruits |
| मूल | जड़ें | roots |
2 ते कि सदा सब दिन मिलिहिं सबुइ समय अनुकूल।।62।।
क्या वे भी सदा, हर दिन और हर समय, अनुकूल रूप से मिलेंगे?
English explanation
Will even those things always be readily available, every day and at every time?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे, पहले बताई वस्तुएँ | those things just mentioned |
| कि | क्या | will ...?; whether |
| सदा | सदा | always |
| सब | हर; सभी | every; all |
| दिन | दिन | day |
| मिलिहिं | मिलेंगे | will be available |
| सबुइ | हर; सभी ही | every; all without exception |
| समय | समय | time |
| अनुकूल | अनुकूल रूप से; सहज उपलब्ध | readily; under favorable conditions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 62
- स्रोत अभिलेख
- 2.62
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 395, 395
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