अयोध्याकाण्ड · दोहा 61 · दोहा/सोरठा
गुर श्रुति संमत धरम फलु पाइअ बिनहिं कलेस।
गुर श्रुति संमत धरम फलु पाइअ बिनहिं कलेस।
हठ बस सब संकट सहे गालव नहुष नरेस।।61।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.61 · पुस्तक पृ. 394, 395
भावार्थ और शब्दार्थ
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1गुर श्रुति संमत धरम फलु पाइअ बिनहिं कलेस।
गुरु और वेदों से सम्मत धर्म का फल बिना ही क्लेश के प्राप्त होता है।
English explanation
The fruit of duty approved by the spiritual teacher and the Vedas is attained without hardship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | spiritual teacher |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| संमत | से अनुमोदित | approved by |
| धरम | धर्म या कर्तव्य का | of religious duty |
| फलु | फल | fruit or reward |
| पाइअ | प्राप्त होता है | is attained |
| बिनहिं | बिना ही | without any |
| कलेस | कष्ट | hardship |
2 हठ बस सब संकट सहे गालव नहुष नरेस।।61।।
हठ के वश होकर गालव ऋषि और राजा नहुष ने सभी संकट सहे।
English explanation
Driven by obstinacy, the sage Galava and King Nahusha endured all manner of troubles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हठ | हठ के | of obstinacy |
| बस | वश होकर | under the sway |
| सब | सभी | all |
| संकट | कष्ट या विपत्तियाँ | troubles or adversities |
| सहे | सहे | endured |
| गालव | गालव ऋषि | the sage Galava |
| नहुष | नहुष | Nahusha |
| नरेस | राजा | king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 61
- स्रोत अभिलेख
- 2.61
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 394, 395
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