अयोध्याकाण्ड · दोहा 28 · दोहा/सोरठा
भूप मनोरथ सुभग बनु सुख सुबिहंग समाजु।
भूप मनोरथ सुभग बनु सुख सुबिहंग समाजु।
भिल्लनि जिमि छाड़न चहति बचनु भयंकरु बाजु।।28।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.28 · पुस्तक पृ. 366, 367
भावार्थ और शब्दार्थ
1भूप मनोरथ सुभग बनु सुख सुबिहंग समाजु।
राजा के मनोरथ एक सुंदर वन के समान हैं और उनके सुख उसमें सुंदर पक्षियों के झुंड के समान।
English explanation
The king’s aspirations are like a lovely forest, and his joys like flocks of beautiful birds within it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा दशरथ के | King Dasharatha’s |
| मनोरथ | आकांक्षाएँ; मन की अभिलाषाएँ | aspirations; cherished wishes |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| बनु | वन | forest |
| सुख | सुख; आनंद | joys; happiness |
| सुबिहंग | सुंदर पक्षी | beautiful birds |
| समाजु | समूह; झुंड | flock; gathering |
2 भिल्लनि जिमि छाड़न चहति बचनु भयंकरु बाजु।।28।।
कैकेयी मानो किसी भील शिकारी स्त्री की तरह उस वन के पक्षियों पर अपने भयंकर वचनरूपी बाज को छोड़ना चाहती है।
English explanation
Like a Bhil huntress, Kaikeyi wishes to release the fearsome hawk of her words upon the birds in that forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भिल्लनि | भील शिकारी स्त्री | a Bhil huntress |
| जिमि | की तरह | like |
| छाड़न | छोड़ना; उड़ाना | to release; to let fly |
| चहति | चाहती है | wishes |
| बचनु | वचन; कही जानेवाली बात | words; the intended utterance |
| भयंकरु | भयानक | fearsome |
| बाजु | बाज, शिकारी पक्षी | hawk, a hunting bird |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 28
- स्रोत अभिलेख
- 2.28
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 366, 367
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।