अयोध्याकाण्ड · दोहा 203 · दोहा/सोरठा
भरत तीसरे पहर कहँ कीन्ह प्रबेसु प्रयाग।
भरत तीसरे पहर कहँ कीन्ह प्रबेसु प्रयाग।
कहत राम सिय राम सिय उमगि उमगि अनुराग।।203।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.203 · पुस्तक पृ. 512, 512
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भरत तीसरे पहर कहँ कीन्ह प्रबेसु प्रयाग।
भरत ने दिन के तीसरे पहर में प्रयाग में प्रवेश किया।
English explanation
Bharata entered Prayaga in the third watch of the day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत ने | Bharata |
| तीसरे | तीसरे | third |
| पहर | पहर | watch of the day |
| कहँ | में; के समय | during |
| कीन्ह | किया | made |
| प्रबेसु | प्रवेश | entry |
| प्रयाग | प्रयाग में | into Prayaga, the sacred confluence |
2 कहत राम सिय राम सिय उमगि उमगि अनुराग।।203।।
प्रेम बार-बार उमड़ रहा था और भरत ‘राम, सीता; राम, सीता’ कहते जा रहे थे।
English explanation
With love surging again and again, Bharata kept saying, ‘Rama, Sita; Rama, Sita.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | saying |
| राम | राम | Rama |
| सिय | सीता | Sita |
| राम | राम | Rama |
| सिय | सीता | Sita |
| उमगि | उमड़कर | surging |
| उमगि | बार-बार उमड़कर | surging again |
| अनुराग | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 203
- स्रोत अभिलेख
- 2.203
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 512, 512
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