अयोध्याकाण्ड · दोहा 204 · दोहा/सोरठा
अरथ न धरम न काम रुचि गति न चहउँ निरबान।
अरथ न धरम न काम रुचि गति न चहउँ निरबान।
जनम जनम रति राम पद यह बरदानु न आन।।204।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.204 · पुस्तक पृ. 512, 513
भावार्थ और शब्दार्थ
1अरथ न धरम न काम रुचि गति न चहउँ निरबान।
मुझे न धन की, न धर्म की, न भोगों की रुचि है; मैं निर्वाणरूपी मुक्ति भी नहीं चाहता।
English explanation
I have no desire for wealth, religious merit, or worldly pleasures; nor do I seek the state of liberation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अरथ | धन; अर्थ-पुरुषार्थ | wealth; material prosperity |
| न | नहीं | not |
| धरम | धर्म; धार्मिक पुण्य | religious duty and merit |
| न | नहीं | not |
| काम | भोग; सांसारिक इच्छाएँ | pleasures; worldly desires |
| रुचि | रुचि; चाह | desire; inclination |
| गति | अवस्था; परम गति | state; ultimate destination |
| न | नहीं | not |
| चहउँ | मैं चाहता हूँ | I desire |
| निरबान | निर्वाण; मोक्ष | liberation; release |
2 जनम जनम रति राम पद यह बरदानु न आन।।204।।
जन्म-जन्म राम के चरणों में प्रेम बना रहे—यही वरदान चाहिए, कोई दूसरा नहीं।
English explanation
May I have love for Rama’s feet in birth after birth—this alone is the boon I seek, no other.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनम | जन्म | birth |
| जनम | हर जन्म में | in every successive birth |
| रति | प्रेम; अनुराग | love; devotion |
| राम | राम के | of Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| यह | यही | this alone |
| बरदानु | वरदान | boon |
| न | नहीं | not |
| आन | अन्य; दूसरा | another; any other |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 204
- स्रोत अभिलेख
- 2.204
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 512, 513
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।