अयोध्याकाण्ड · दोहा 205 · दोहा/सोरठा
तनु पुलकेउ हियँ हरषु सुनि बेनि बचन अनुकूल।
तनु पुलकेउ हियँ हरषु सुनि बेनि बचन अनुकूल।
भरत धन्य कहि धन्य सुर हरषित बरषहिं फूल।।205।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.205 · पुस्तक पृ. 513, 514
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तनु पुलकेउ हियँ हरषु सुनि बेनि बचन अनुकूल।
त्रिवेणी के अनुकूल वचन सुनकर भरत का शरीर रोमांचित हो गया और हृदय में हर्ष भर गया।
English explanation
Hearing the confluence’s reassuring words, Bharata’s body thrilled and joy arose in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तनु | शरीर | body |
| पुलकेउ | रोमांचित हुआ | thrilled with goosebumps |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| हरषु | आनंद, हर्ष | joy |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बेनि | त्रिवेणी के | of the three-river confluence |
| बचन | वचन | words |
| अनुकूल | अनुकूल, आश्वस्त करने वाले | favorable, reassuring |
2 भरत धन्य कहि धन्य सुर हरषित बरषहिं फूल।।205।।
देवता हर्षित होकर ‘भरत धन्य हैं, धन्य हैं’ कहते हुए फूल बरसाने लगे।
English explanation
Rejoicing, the gods showered flowers, saying, “Blessed is Bharata, blessed!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| धन्य | धन्य हैं, प्रशंसनीय हैं | is blessed, worthy of praise |
| कहि | कहकर, कहते हुए | saying |
| धन्य | धन्य हैं | blessed indeed |
| सुर | देवता | the gods |
| हरषित | आनंदित होकर | rejoicing |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower |
| फूल | पुष्प | flowers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 205
- स्रोत अभिलेख
- 2.205
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 513, 514
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।