अयोध्याकाण्ड · दोहा 202 · दोहा/सोरठा
प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि सिरु नाइ।
प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि सिरु नाइ।
आगें किए निषाद गन दीन्हेउ कटकु चलाइ।।202।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.202 · पुस्तक पृ. 511, 512
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि सिरु नाइ।
प्रातःकालीन क्रियाएँ करके, माताओं के चरणों की वंदना करके और गुरु को सिर झुकाकर प्रणाम करके—
English explanation
Having performed his morning observances, revered his mothers’ feet, and bowed his head to the guru—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रातक्रिया | प्रातःकाल की नित्य क्रियाएँ | morning observances |
| करि | करके | having performed |
| मातु | माताओं के | of the mothers |
| पद | चरण | feet |
| बंदि | वंदना करके | having reverently saluted |
| गुरहि | गुरु को | to the guru |
| सिरु | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
2 आगें किए निषाद गन दीन्हेउ कटकु चलाइ।।202।।
भरत ने निषादों के समूह को आगे किया और सेना को चलवा दिया।
English explanation
Bharata placed the Nishadas in front and set the army on its way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगें | आगे | in front |
| किए | किया | placed |
| निषाद | निषादों का | of the Nishadas |
| गन | समूह | group |
| दीन्हेउ | करवा दिया | caused |
| कटकु | सेना को | the army |
| चलाइ | चलना | to march |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 202
- स्रोत अभिलेख
- 2.202
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 511, 512
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।