अयोध्याकाण्ड · सोरठा 201 · सोरठा
अंतरजामी रामु सकुच सप्रेम कृपायतन।
अंतरजामी रामु सकुच सप्रेम कृपायतन।
चलिअ करिअ बिश्रामु यह बिचारि दृढ़ आनि मन॥ २०१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.201 · पुस्तक पृ. 510, 510
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अंतरजामी रामु सकुच सप्रेम कृपायतन।
राम अंतर्यामी, संकोचशील, प्रेमयुक्त और कृपा के धाम हैं।
English explanation
Rama knows the inner heart, is tenderly reserved and loving, and is the abode of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंतरजामी | सबके अंतःकरण को जानने वाले | knower of everyone's inner heart |
| रामु | राम | Rama |
| सकुच | संकोचशील; दूसरों का लिहाज करने वाले | reserved; considerate of others |
| सप्रेम | प्रेमयुक्त | loving; full of affection |
| कृपायतन | कृपा के धाम | abode of compassion |
2चलिअ करिअ बिश्रामु यह बिचारि दृढ़ आनि मन॥ २०१॥
यह विचार मन में दृढ़ करके चलिए और विश्राम कीजिए।
English explanation
Holding this thought firmly in your mind, proceed and take rest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलिअ | चलिए | please proceed |
| करिअ | कीजिए | please take; do |
| बिश्रामु | विश्राम | rest |
| यह | यह | this |
| बिचारि | विचारकर | having considered |
| दृढ़ | दृढ़; अटल | firm; steadfast |
| आनि | लाकर; स्थापित करके | bringing; establishing |
| मन | मन में | in the mind |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- सोरठा 201
- स्रोत अभिलेख
- 2.201
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 510, 510
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