अयोध्याकाण्ड · दोहा 143 · दोहा/सोरठा
भयउ निषाद बिषादबस देखत सचिव तुरंग।
भयउ निषाद बिषादबस देखत सचिव तुरंग।
बोलि सुसेवक चारि तब दिए सारथी संग।।143।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.143 · पुस्तक पृ. 462, 463
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भयउ निषाद बिषादबस देखत सचिव तुरंग।
मंत्री सुमंत्र और घोड़ों को देखकर निषादराज शोक के वश हो गए।
English explanation
Seeing the minister Sumantra and the horses, the Nishada king was overcome with grief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गए | became |
| निषाद | निषादराज गुह | Guha, the Nishada king |
| बिषादबस | शोक के वश | overcome with grief |
| देखत | देखकर | on seeing |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र को | the minister Sumantra |
| तुरंग | घोड़ों को | the horses |
2 बोलि सुसेवक चारि तब दिए सारथी संग।।143।।
तब निषादराज ने चार अच्छे सेवकों को बुलाकर सारथी सुमंत्र के साथ भेज दिया।
English explanation
Then the Nishada king summoned four capable attendants and sent them along with Sumantra, the charioteer.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोलि | बुलाकर | having summoned |
| सुसेवक | अच्छे सेवक | capable attendants |
| चारि | चार | four |
| तब | तब | then |
| दिए | भेज दिए | sent |
| सारथी | सारथी सुमंत्र के | the charioteer Sumantra |
| संग | साथ | along with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 143
- स्रोत अभिलेख
- 2.143
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 462, 463
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