अयोध्याकाण्ड · दोहा 142 · दोहा/सोरठा
नहिं तृन चरहिं पिअहिं जलु मोचहिं लोचन बारि।
नहिं तृन चरहिं पिअहिं जलु मोचहिं लोचन बारि।
ब्याकुल भए निषाद सब रघुबर बाजि निहारि।।142।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.142 · पुस्तक पृ. 461, 462
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1नहिं तृन चरहिं पिअहिं जलु मोचहिं लोचन बारि।
घोड़े न घास चरते हैं, न जल पीते हैं; उनकी आँखों से आँसू बहते हैं।
English explanation
The horses neither graze on grass nor drink water; they shed tears from their eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं | not; neither |
| तृन | घास | grass |
| चरहिं | चरते हैं | graze on |
| पिअहिं | पीते हैं | drink |
| जलु | पानी | water |
| मोचहिं | छोड़ते हैं; बहाते हैं | release; shed |
| लोचन | आँखों से | from their eyes |
| बारि | जल; यहाँ आँसू | water; here, tears |
2 ब्याकुल भए निषाद सब रघुबर बाजि निहारि।।142।।
राम के घोड़ों को देखकर सभी निषाद व्याकुल हो गए।
English explanation
All the Nishadas became distressed on seeing Rama’s horses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्याकुल | व्याकुल | distressed |
| भए | हो गए | became |
| निषाद | निषाद समुदाय के लोग | the Nishada people |
| सब | सभी | all |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम के | of Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| बाजि | घोड़ों को | horses |
| निहारि | देखकर | on seeing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 142
- स्रोत अभिलेख
- 2.142
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 461, 462
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।