अयोध्याकाण्ड · दोहा 144 · दोहा/सोरठा
बिप्र बिबेकी बेदबिद संमत साधु सुजाति।
बिप्र बिबेकी बेदबिद संमत साधु सुजाति।
जिमि धोखें मदपान कर सचिव सोच तेहि भाँति।।144।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.144 · पुस्तक पृ. 463, 464
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बिप्र बिबेकी बेदबिद संमत साधु सुजाति।
एक विवेकी, वेदज्ञ, सम्मानित, सदाचारी और कुलीन ब्राह्मण—
English explanation
A discerning, Veda-learned, respected, virtuous Brahmin of good lineage—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmin |
| बिबेकी | विवेकशील | discerning |
| बेदबिद | वेदों का ज्ञाता | versed in the Vedas |
| संमत | सम्मानित, मान्य | respected, esteemed |
| साधु | सदाचारी | virtuous |
| सुजाति | अच्छे कुल में जन्मा | of good lineage |
2 जिमि धोखें मदपान कर सचिव सोच तेहि भाँति।।144।।
जैसे ऐसा ब्राह्मण भूल से मदिरा पी लेने पर पछताए, उसी प्रकार मंत्री सुमंत्र शोक करते हैं।
English explanation
As such a Brahmin would lament after drinking alcohol by mistake, so does the minister Sumantra grieve.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | as |
| धोखें | भूल से | by mistake |
| मदपान | मदिरा का सेवन | drinking alcohol |
| कर | करे | does |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र | the minister Sumantra |
| सोच | शोक करते हैं | grieves |
| तेहि | उसी | that same |
| भाँति | प्रकार | manner |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 144
- स्रोत अभिलेख
- 2.144
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 463, 464
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