अयोध्याकाण्ड · दोहा 287 · दोहा/सोरठा
बार बार मिलि भेंट सिय बिदा कीन्ह सनमानि।
बार बार मिलि भेंट सिय बिदा कीन्ह सनमानि।
कही समय सिर भरत गति रानि सुबानि सयानि।।287।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.287 · पुस्तक पृ. 583, 584
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बार बार मिलि भेंट सिय बिदा कीन्ह सनमानि।
बार-बार मिलकर और गले लगाकर उन्होंने सीता को सम्मानपूर्वक विदा किया।
English explanation
After meeting and embracing Sita repeatedly, they sent her off with honor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर-फिर | after time; repeatedly |
| मिलि | मिलकर | having met |
| भेंट | गले लगकर | embracing |
| सिय | सीता को | Sita |
| बिदा | विदा | farewell |
| कीन्ह | किया | gave |
| सनमानि | सम्मान देकर | with honor |
2 कही समय सिर भरत गति रानि सुबानि सयानि।।287।।
सुंदर वाणी वाली समझदार रानी ने उचित अवसर पर भरत की दशा का वर्णन किया।
English explanation
At the right moment, the wise, gracious-speaking queen described Bharata’s condition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कही | बताई | described |
| समय | उचित समय | the right time |
| सिर | पर | at |
| भरत | राम के भाई भरत की | of Bharata, Rama’s brother |
| गति | दशा; मनःस्थिति | condition; state of mind |
| रानि | रानी सुनयना ने | Queen Sunayana |
| सुबानि | सुंदर वाणी वाली | gracious in speech |
| सयानि | समझदार | wise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 287
- स्रोत अभिलेख
- 2.287
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 583, 584
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