अयोध्याकाण्ड · दोहा 214 · दोहा/सोरठा
बहुरि सपरिजन भरत कहुँ रिषि अस आयसु दीन्ह।
बहुरि सपरिजन भरत कहुँ रिषि अस आयसु दीन्ह।
बिधि बिसमय दायकु बिभव मुनिबर तपबल कीन्ह।।214।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.214 · पुस्तक पृ. 521, 521
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बहुरि सपरिजन भरत कहुँ रिषि अस आयसु दीन्ह।
फिर ऋषि ने परिजनों सहित भरत को ऐसा आदेश दिया।
English explanation
Then the sage gave this instruction to Bharata together with his family and attendants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर; इसके बाद | then; afterward |
| सपरिजन | परिजनों और साथियों सहित | together with family and attendants |
| भरत | श्रीराम के छोटे भाई भरत | Bharata, Rama’s younger brother |
| कहुँ | को | to |
| रिषि | ऋषि भरद्वाज ने | sage Bharadvaja |
| अस | ऐसा | such; this |
| आयसु | आदेश; निर्देश | command; instruction |
| दीन्ह | दिया | gave |
2 बिधि बिसमय दायकु बिभव मुनिबर तपबल कीन्ह।।214।।
श्रेष्ठ मुनि ने तप के बल से ऐसा वैभव उत्पन्न किया जो ब्रह्मा को भी आश्चर्य में डालने वाला था।
English explanation
By the power of his austerities, the great sage created splendor that would astonish even Brahma.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा को | to Brahma, the creator |
| बिसमय | आश्चर्य | astonishment |
| दायकु | देने वाला | causing; giving |
| बिभव | वैभव; ऐश्वर्य | splendor; magnificence |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि भरद्वाज ने | the great sage Bharadvaja |
| तपबल | तपस्या के बल से | through the power of austerities |
| कीन्ह | उत्पन्न किया; रचा | created; brought about |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 214
- स्रोत अभिलेख
- 2.214
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 521, 521
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