अयोध्याकाण्ड · दोहा 213 · दोहा/सोरठा
राम बिरह ब्याकुल भरतु सानुज सहित समाज।
राम बिरह ब्याकुल भरतु सानुज सहित समाज।
पहुनाई करि हरहु श्रम कहा मुदित मुनिराज।।213।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.213 · पुस्तक पृ. 520, 521
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम बिरह ब्याकुल भरतु सानुज सहित समाज।
भरत अपने छोटे भाई और पूरे समाज सहित राम के विरह से व्याकुल हैं।
English explanation
Bharata, together with his younger brother and the whole company, is distraught at separation from Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम से | from Rama |
| बिरह | वियोग में | in separation |
| ब्याकुल | व्याकुल | distraught |
| भरतु | भरत | Bharata |
| सानुज | छोटे भाई शत्रुघ्न के साथ | with his younger brother Shatrughna |
| सहित | साथ | together with |
| समाज | सारा साथ आया समुदाय | the accompanying company |
2 पहुनाई करि हरहु श्रम कहा मुदित मुनिराज।।213।।
प्रसन्न मुनिराज ने कहा, ‘अतिथि-सत्कार करके उनकी थकान दूर करो।’
English explanation
The delighted sage said, ‘Offer them hospitality and relieve their fatigue.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पहुनाई | अतिथि-सत्कार | hospitality |
| करि | करके | by offering |
| हरहु | दूर करो | remove |
| श्रम | थकान | fatigue |
| कहा | कहा | said |
| मुदित | प्रसन्न | delighted |
| मुनिराज | मुनिश्रेष्ठ भरद्वाज ने | the eminent sage Bharadvaja |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 213
- स्रोत अभिलेख
- 2.213
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 520, 521
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