अयोध्याकाण्ड · दोहा 68 · दोहा/सोरठा
बहुरि बच्छ कहि लालु कहि रघुपति रघुबर तात।
बहुरि बच्छ कहि लालु कहि रघुपति रघुबर तात।
कबहिं बोलाइ लगाइ हियँ हरषि निरखिहउँ गात।।68।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.68 · पुस्तक पृ. 399, 400
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बहुरि बच्छ कहि लालु कहि रघुपति रघुबर तात।
फिर ‘वत्स’, ‘लाल’, ‘रघुपति’, ‘रघुश्रेष्ठ’, ‘बेटा’ कहकर—
English explanation
Again, calling you ‘my child,’ ‘my darling,’ ‘lord of Raghu’s lineage,’ ‘best of the Raghus,’ and ‘dear son’—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | again |
| बच्छ | वत्स; प्यारे बच्चे | dear child |
| कहि | कहकर | saying |
| लालु | प्यारे बेटे | darling son |
| कहि | कहकर | saying |
| रघुपति | हे रघुकुल के स्वामी राम | O Rama, lord of Raghu’s lineage |
| रघुबर | हे रघुवंश में श्रेष्ठ राम | O Rama, best of Raghu’s lineage |
| तात | प्यारे बेटे | dear son |
2 कबहिं बोलाइ लगाइ हियँ हरषि निरखिहउँ गात।।68।।
कब तुम्हें पुकारकर हृदय से लगाऊँगी और हर्ष से तुम्हारे शरीर को निहारूँगी?
English explanation
When will I call you to me, clasp you to my heart, and joyfully gaze upon your form?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहिं | कब | when |
| बोलाइ | पुकारकर; बुलाकर | calling you near |
| लगाइ | लगाकर | clasping you |
| हियँ | हृदय से | to my heart |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| निरखिहउँ | मैं निहारूँगी | shall I gaze upon |
| गात | तुम्हारा शरीर; रूप | your body; form |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 68
- स्रोत अभिलेख
- 2.68
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 399, 400
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