अयोध्याकाण्ड · दोहा 67 · दोहा/सोरठा
ऐसेउ बचन कठोर सुनि जौं न ह्रदउ बिलगान।
ऐसेउ बचन कठोर सुनि जौं न ह्रदउ बिलगान।
तौ प्रभु बिषम बियोग दुख सहिहहिं पावँर प्रान।।67।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.67 · पुस्तक पृ. 399, 399
भावार्थ और शब्दार्थ
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1ऐसेउ बचन कठोर सुनि जौं न ह्रदउ बिलगान।
यदि ऐसे कठोर वचन सुनकर भी मेरा हृदय नहीं फटा—
English explanation
If, even on hearing such harsh words, my heart has not broken—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसेउ | ऐसे भी | even such |
| बचन | वचन | words |
| कठोर | कठोर | harsh |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| जौं | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| ह्रदउ | हृदय | heart |
| बिलगान | फटा; टूट गया | split; broke |
2 तौ प्रभु बिषम बियोग दुख सहिहहिं पावँर प्रान।।67।।
तो हे प्रभु, ये अभागे प्राण आपके असह्य वियोग का दुःख भी सहेंगे।
English explanation
Then, my lord, this wretched life will endure even the anguish of unbearable separation from you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| प्रभु | हे स्वामी | my lord |
| बिषम | अत्यंत कठिन; असह्य | terrible; unbearable |
| बियोग | आपसे वियोग का | of separation from you |
| दुख | दुःख | anguish |
| सहिहहिं | सहेंगे | will endure |
| पावँर | अभागे; दीन | wretched |
| प्रान | प्राण; जीवन | life; vital breaths |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 67
- स्रोत अभिलेख
- 2.67
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 399, 399
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