अयोध्याकाण्ड · दोहा 69 · दोहा/सोरठा
सीतहि सासु असीस सिख दीन्हि अनेक प्रकार।
सीतहि सासु असीस सिख दीन्हि अनेक प्रकार।
चली नाइ पद पदुम सिरु अति हित बारहिं बार।।69।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.69 · पुस्तक पृ. 400, 401
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सीतहि सासु असीस सिख दीन्हि अनेक प्रकार।
सास ने सीता को अनेक प्रकार के आशीर्वाद और शिक्षाएँ दीं।
English explanation
Her mother-in-law gave Sita blessings and counsel of many kinds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीतहि | सीता को | to Sita |
| सासु | सास कौसल्या ने | her mother-in-law Kaushalya |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| सिख | शिक्षा और सलाह | counsel |
| दीन्हि | दी | gave |
| अनेक | अनेक | many |
| प्रकार | प्रकार की | kinds of |
2 चली नाइ पद पदुम सिरु अति हित बारहिं बार।।69।।
सीता अत्यंत प्रेम से सास के चरण-कमलों में बार-बार सिर झुकाकर चलीं।
English explanation
With deep affection, Sita repeatedly bowed her head at her mother-in-law’s lotus feet and departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चली | चलीं | departed |
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| पद | चरणों में | at the feet |
| पदुम | कमल-समान | lotus-like |
| सिरु | सिर | her head |
| अति | अत्यंत | deep |
| हित | प्रेम से | with affection |
| बारहिं | बार-बार के प्रयोग का पहला पद | repeatedly, with the following word |
| बार | बार | time |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 69
- स्रोत अभिलेख
- 2.69
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 400, 401
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