अयोध्याकाण्ड · दोहा 252 · दोहा/सोरठा
निसि न नीद नहिं भूख दिन भरतु बिकल सुचि सोच।
निसि न नीद नहिं भूख दिन भरतु बिकल सुचि सोच।
नीच कीच बिच मगन जस मीनहि सलिल सँकोच।।252।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.252 · पुस्तक पृ. 553, 554
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1निसि न नीद नहिं भूख दिन भरतु बिकल सुचि सोच।
भरत को रात में नींद नहीं और दिन में भूख नहीं लगती; वे निर्मल चिंता से व्याकुल हैं।
English explanation
Bharata has no sleep at night and no appetite by day; he is distraught with selfless concern.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसि | रात में | at night |
| न | नहीं | no |
| नीद | नींद | sleep |
| नहिं | नहीं | no |
| भूख | भूख | appetite |
| दिन | दिन में | by day |
| भरतु | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama's brother |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| सुचि | पवित्र; निष्कपट | pure; selfless |
| सोच | चिंता से | with concern |
2 नीच कीच बिच मगन जस मीनहि सलिल सँकोच।।252।।
भरत ऐसे व्याकुल हैं जैसे पानी घटने पर मछली नीचे की कीचड़ में धँस जाती है।
English explanation
Bharata is distressed like a fish left sunk in the mud below as the water dwindles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीच | नीचे की; गहरी | low-lying; deep |
| कीच | कीचड़ | mud |
| बिच | में; बीच | in; amid |
| मगन | धँसी हुई | sunk; immersed |
| जस | जैसे | like |
| मीनहि | मछली को; मछली की दशा | a fish, in its plight |
| सलिल | जल | water |
| सँकोच | घटने पर; कमी | dwindling; depletion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 252
- स्रोत अभिलेख
- 2.252
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 553, 554
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।