अयोध्याकाण्ड · दोहा 253 · दोहा/सोरठा
गुर पद कमल प्रनामु करि बैठे आयसु पाइ।
गुर पद कमल प्रनामु करि बैठे आयसु पाइ।
बिप्र महाजन सचिव सब जुरे सभासद आइ।।253।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.253 · पुस्तक पृ. 554, 555
भावार्थ और शब्दार्थ
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1गुर पद कमल प्रनामु करि बैठे आयसु पाइ।
गुरु के चरण-कमलों में प्रणाम करके भरत आज्ञा पाकर बैठ गए।
English explanation
Bharata bowed to the guru's lotus feet and sat down with his permission.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु वसिष्ठ के | guru Vasishtha's |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| प्रनामु | प्रणाम | obeisance |
| करि | करके | having made |
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| पाइ | पाकर | having received |
2 बिप्र महाजन सचिव सब जुरे सभासद आइ।।253।।
ब्राह्मण, प्रतिष्ठित नागरिक, मंत्री और सभी सभासद आकर एकत्र हुए।
English explanation
Brahmins, prominent citizens, ministers, and all the assembly members came and gathered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmins |
| महाजन | प्रतिष्ठित नागरिक | prominent citizens |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| सब | सभी | all |
| जुरे | एकत्र हुए | gathered |
| सभासद | सभा के सदस्य | assembly members |
| आइ | आकर | having come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 253
- स्रोत अभिलेख
- 2.253
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 554, 555
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