अयोध्याकाण्ड · दोहा 254 · दोहा/सोरठा
राखें राम रजाइ रुख हम सब कर हित होइ।
राखें राम रजाइ रुख हम सब कर हित होइ।
समुझि सयाने करहु अब सब मिलि संमत सोइ।।254।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.254 · पुस्तक पृ. 555, 556
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1राखें राम रजाइ रुख हम सब कर हित होइ।
राम की आज्ञा और इच्छा का मान रखने से हम सबका हित होगा।
English explanation
By honoring Rama’s command and wishes, the welfare of us all will be served.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राखें | मान रखने से | by honoring |
| राम | राम की | Rama’s |
| रजाइ | आज्ञा | command |
| रुख | इच्छा या अभिप्राय | wish or intention |
| हम | हम | us |
| सब | सब | all |
| कर | का | of |
| हित | कल्याण | welfare |
| होइ | होगा | will result |
2 समुझि सयाने करहु अब सब मिलि संमत सोइ।।254।।
हे समझदार लोगो, यह समझकर अब सब मिलकर उसी बात पर सहमति करो।
English explanation
Wise people, understand this and now all join in agreeing upon that course.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | समझकर | having understood |
| सयाने | हे समझदार लोगो | O wise people |
| करहु | करो | make |
| अब | अब | now |
| सब | सभी | all |
| मिलि | मिलकर | together |
| संमत | सहमति | agreement |
| सोइ | उसी पर | upon that very course |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 254
- स्रोत अभिलेख
- 2.254
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 555, 556
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।